सरस आजीविका ने दी ट्रांसजेंडर्स के हौसले को स्वावलंबन की परवाज़

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एंव पंचायती राज संस्थान द्रारा आयोजित सरस आजीविका मेले में भारी बारिश के बाद सोमवार से गुरुग्रामवासियों का आना शुरु हो गया है। मंत्रालय के दीन दयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण अजीविका मिशन ने ग्रामीण महिला स्वंय सहायता समूहों ना सिर्फ बड़े शहर में बाज़ार उपलब्ध कराया बल्कि ट्रांसजेडर को भी समाज की मुख्य धारा में जोड़कर एक बड़ा प्लेटफॉर्म प्रदान कर रही है।


इस मेले के फूड कोर्ट में एक छत के नीचे अलग-अलग राज्यों के व्यंजनों के स्वाद के बीच स्टॉल नंबर 18 है जिसे केरल से आए तीन ट्रांस जेंडर चला रहे हैं।
जहां गुरुग्रामवासी अपनी पसंद के फल, शेक, जूस के साथ-साथ फ्रूट चाट और सब्जियों के चाट की स्वाद ले रहे हैं।


केरल के कोच्चि स्थित जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में 5 साल पहले ‘लक्ष्य’ नाम से एक प्रतिष्ठान की शुरुआत करते हुए इन तीन ट्रांसजेंडर जूस, अचार और हैंडीक्राफ्ट से जुड़े सामान के साथ की थी और देखते ही देखते आज ये केरल के साथ-साथ दूसरे राज्यों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।

इन लोगों का लक्ष्य ट्रांसजेडर समाज को स्वावलंबन की राह दिखाना है। लक्ष्या का संचालन करने वाली और 2019 से सरस अजीविका मेले का हिस्सा बनी अमृता जोज़ेफ मैत्थू बताती है कि केरस सरकार के साथ भारत सरकार की योजनाओं के चलते उन्हें ये मौक़ा मिला है और बड़े-बडे शहरों में अपनी इस समुदाय का प्रतिनिधित्व कर पा रही है।


इस मेले के साथ साथ कोच्चि स्थित दुकान की कमाई प्रतिदिन 5 हज़ार तक पहुंच गई है। 12वीं कर चुकी इनकी सहयोगी अनामिका राजेंद्र आस-पास के बच्चों को पढ़ाई में मदद कर रही है जबकि तीसरे सहयोगी मिधु पवित्रन व्यवसाय के साथ साथ समाज के लोगों को जागरुक कर अपने पैरों पर खड़े होने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं


समाज के साथ साथ अपने ही परिवार में स्वीकार्य न होने के दर्द को दरकिनार कर सफलता का उद्देश्य लिए तीन ट्रांसजेंडर ने एक नज़ीर पेश की है और अपने पैरों पर खड़े होकर स्वावलंबन की राह पर चल पड़े हैं। उनके काम को ना सिर्फ केरल बल्कि पूरे देश में सराहा जा रहा है।

Saras mela
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